माटी के बेटा संगी

माटी के ये बेटा संगी।
माटी बर ये बड़ मया करय।।
जीन्दगी भर ये माटी के।
जतन करे ला नइतो छोड़य।।

घाम के ये दिन बादर रहय।
तिपे भुईया मा तन सुलसय।।
जरत भुईया उखरा रेगय।
तन ले पसीना ह चुचवाय।।

पर माटी...........

बारिश के दिन बादर राहय।
मन ओकर खेत डहर भागय।।
बिजली चमकय, बादर गरजय।
हवा गर्रा घलो हा आजय।।
बादर के करा मा तन पिटावय।
बरसत पानी खेत म जावय।।

पर माटी..............

जाड़ के ये दिन बादर रहय।
सन्झा बिहनीया तन ठुठरय।।
हाथ गोड़ ह करा कस हावय।
जब जाड़ हा तन भीतर घुसय।।
जाड़ हा ये तन मा जनावय।
बाँधे पागा बुता भीड़जय।।

पर माटी..............

##########################################
हेमलाल साहू
ग्राम-गिधवा, पो.-नगधा,थाना-नादघाट,
तहसील-नवागढ़,जिला- बेमेतरा (छ.ग.)
मो. नम्बर – 9977831273, 9907737593
bahadurlal_shastri@yahoo.com,
hemlalshahu@gmail.com


http://www.gurturgoth.
में प्रकाशित रचना

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें