इहि माटी इहि भुईयाँ

इहि माटी इहि भुईयाँ, इहे जीनगी मोर।
जनम जनम रिश्ता हवे, झन भुलव मया तोर।।

तोर मया हावे दाई, तहि महतारी मोर।
मोर बर राखे रहिबे, बाँध गठरी मया तोर।।

इहि माटी इहि भुईया, इही मा गाव मोर।
चिरइ चिरबुन के बोली, रूख् राइ हे तोर।।

गिधवा गाव जनम हवे, हेम हे नाव मोर।
माटी जतन करईया, माटी बेटा तोर।।
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रचना दिनांक— 11.06.2015

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