आवा आवा रे आवा ना

आवा आवा रे आवा ना,
किसान अऊ बनिहार मन आवा ना।
आगे आगे रे आगे ना,
बारीश के दिन बादर आगे ना।

चलव चलव रे चलव ना,
खेती अऊ खार चलव ना।
आवा आवा रे आवा ना,
किसान अऊ बनिहार मन आवा ना।

धरव-धरव रे धरव ना,
नागर अऊ बैइला ला धरव ना।
बोवव-बोवव रे बोवव ना,
धान  ला बोवव ना।

आवा आवा रे आवा ना
किसान अऊ बनिहार मन आवा ना।
निदव-निदव रे निदव ना,
बन अऊ कचरा ला निदव ना।

डालव डालव रे डालव ना
खातू अऊ माटी ला डालव ना।
करव- करव रे करव ना
बियासी अऊ बतर ला करव ना।

देखव देखव रे देखव ना
मुही अऊ पार ला देखव ना।
निकालव निकालव रे निकालव ना,
करगा अऊ बदवरी ला निकालव ना।

लुवव लुवव ने लुवव ना,
धान ला लुवव ना।
नानव नानव रे नानव ना,
धान  ला नानव ना।

मिसव मिसव रे मिसव ना,
धान  ला मिसव ना।
धरव धरव रे धरव ना,
कोठी अऊ किरगा मा धरव ना।

आवा आवा ने आवा ना,
किसान अऊ मजदूर मन आवा ना।
नाचव नाचव रे नाचव ना,
किसान अऊ मजदूर मन नाचव ना।

गावव गावव रे गावव ना,
करमा अऊ ददरिया गावव ना।
आवा आवा रे आवा ना,
किसान अऊ बनिहार मन आवा ना।
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जनम जनम के बंधना संगी, मया प्रित के छाँव।
छत्तीसगढ़ के मया करईया, गाँव देहात के ताव।
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ये रचना छत्तीसगढ़ी वेब पत्रिका गूतूर गोठ मे भी प्रकाशित हे।
ये रचना ला आप मान गूतूर गोठ के लिंक http://www.gurturgoth.com में जाके पढ़ सकत हव।
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