तुहर मया दुलार


तुहर मया दुलार हवे, अउ तुहर दया पाव।
तुहरे मया दुलार मा, जीनगी ल बीताव।।

अइसन मया दुलार ला, सदा बनाय रहाव।
तुहरे छोट भाई मै, माटी बेटा ताव।।

तुहर मया अउ दया के, छइहा सदा रहाय।
लागे मोला पिपर कस, सुघ्घर हरियर छाव।।

जीनगी मा तुहर सदा, मैं आशिष ला पाव।
दाई ददा के मै सदा, जीनगी म गुन गाव।।

तन मा जीवन के रहत ले, माटी माथ नवाव।
माटी के बेटा अंव, माटी मा मिल जाव।।

भुईया हा महतारी, उहिच ला गोहराव।
मै भुईया दाई के, जतन करत राहाव।।
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रचना दिनांक 12.06.2015

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