मंगलवार, 21 मार्च 2017

जूनी मेला (सार छन्द)

सँजे-धजे  हे बइला गाड़ी, जावत हावय मेला।
गाँव गाँव के लोग लुगाई, जावत रेलम पेला।।

रखै आस दरशन के मनमा, गावत जावय गाना।
जियत मरत के मेला हावय, नइ हे फेर ठिकाना।।

अरे तता कहिके हाँकत हे, सुघ्घर बइला गाड़ी।
बइठे लइका अउ सियान मन, धरके खूंटा काड़ी।।

हवै भराये बीच खार मा, जूनी जी के मेला।
आनी बानी लगै समाने, सबो डहर हे ठेला।।

गुन गालव जूनी दाई के, महिमा हावय भारी।
बने नहा तरिया मा जी, उज्जर हो मन कारी।।

रोग शोक ला दाई हरथे, करले मनमा सुमिरन।
ठगड़ी ठाठा फलते फुलथे, करथे जब मन अरपन।।

आय सेरसेरा पन्नी मा, मेला ला लगवाथे।
जूनी जी के महिमा गावत, मोरो मन सहराथे।।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

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