बुधवार, 8 फ़रवरी 2017

बिलासा केंवटिन (आल्हा छन्द)

आवव संगी सुनव कहानी, रहिस सती नारी ओ वीर।
नाव बिलासा जात केंवटिन, रहै बसेरा नदिया तीर।।

छोटे छोटे गाँव रहै गा, छितका कुरिया मुकुत दुवार।
आमा अउ मउहा परसा के, रुख राई अरपा के पार।।

जइसे वो बघवा कस ताकै, बइरी मन सब जावय हार।
खोंपा पारै अलवा जलवा, इही बिलासा के सिंगार।।

मरद बरोबर लगै बिलासा, रेंगय  जब धरके तलवार।
जम्मो बइरी थरथर काँपै, लागय देवी के अवतार।।

हिरदे मा रख भाव दया के, राजा के राखै गा मान।
सेवा कर घायल राजा के, कइयो पइत बचाइस जान ।।

राजा देदिस राज कोष ला, देख बिलासा के बड़ काम।
पाइस ठाठ राजसी ओहर, फइलिस चारों कोती नाम।।

बनिस अंग रक्षक राजा के, बने चलावै तीर कमान।
दिल्ली मा करतब दिखलाइस, बढ़िस बिलासा के पहचान।।

बस गय शहर बिलासपुर तोर, कर गय अमर बिलासा नाम।
स्वाभिमान नारी झन खोवै, दे के गइस इही पैगाम।।
                      
-हेमलाल साहू
ग्राम- गिधवा, पोस्ट- नगधा,
तहसील- नवागढ़, जिला - बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो. 9977831273

  

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